Tuesday, June 9, 2009

स्लमडॉग मिलियनेअर' के चाइल्ड आर्टिस्ट रुबीना और अजहर के सम्मान में ब्रिटिश संसद में चाय पार्टी .

लंदन।। ऑस्कर विजेता 'स्लमडॉग मिलियनेअर' के चाइल्ड आर्टिस्ट रुबीना अली और अजहरुद्दीन मोहम्मद इस्माइल के सम्मान में ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमंस में चाय पार्टी की जाएगी। इसमें ये दोनों कलाकार भी शरीक होंगे। भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कीथ वाज ने अप्रैल में इन दोनों को ब्रिटेन आने का न्योता दिया था।

वाज के मुताबिक, हमें खुशी है कि रुबीना और अजहर के परिवारवालों ने इस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। ये बाल कलाकार वेस्टमिंस्टर के हाउस ऑफ कॉमंस में आयोजित चाय पार्टी में शरीक होंगे और अपने प्रशंसकों और विशिष्ट अतिथियों से मिलेंगे। हालांकि इस यात्रा की तारीखें अभी तय नहीं हुई हैं। इस टूर को कई लोग और संगठन स्पॉन्सर करेंगे। बच्चे ऑस्कर समारोह के दौरान अमेरिका जा चुके हैं पर उन्हें अभी तक ब्रिटेन जाने का मौका नहीं मिला।

Wednesday, June 3, 2009

भारतीय नौकरशाह एशिया में सबसे अयोग्य :- सर्वे

एशिया की 12 बड़ी आर्थिक शक्तियों में सिंगापुर के प्रशासनिक अधिकारी एक सर्वे में सबसे ज्यादा योग्य पाए गए हैं। बिजनेस सर्वे में भारतीय नौकरशाहों को सबसे निचले पायदान पर रखा गया है और कहा गया है कि उनके साथ काम करने का अनुभव काफी सुस्त और कष्ट देने वाला है। यह भी कहा गया है कि एशियाई देशों के नौकरशाह विपरीत परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। हॉन्गकॉन्ग की पॉलिटिकल और इकनॉमिक रिस्क कंसल्टेंसी (पीईआरसी)की ओर से किए गए इस सर्वे में सिंगापुर को लगातार तीसरी बार पहले पायदान पर रखा गया है। हॉन्गकॉन्ग को दूसरे, थाइलैंड को तीसरे, साउथ कोरिया को चौथे, जापान को पांचवे, मलयेशिया को छठे, ताइवान को सातवें, वियतनाम को आठवें, चीन को नौवें, फिलीपीन को दसवें, इंडोनेशिया को 11वें और भारत को 12वें नंबर पर रखा गया है। यह सर्वे पिछली बार साल 2007 में किया गया था।

रिपोर्ट में कहा है कि सामान्य दिनों में (जब सिस्टम पर कोई खास दबाव नहीं होता)इन एशियाई देशों के नौकरशाह काफी अच्छा प्रदर्शन करते हैं, पर बुरे हालात में इन नौकरशाहों का प्रदर्शन ऐसा होता है कि उस वक्त उनके कामकाज में न तो पारदर्शिता दिखती है और न ही जिम्मेदारी का बोध।

थाइलैंड के बारे में इस सर्वे में खास तौर पर कहा गया है कि इस देश में राजनीतिक उथल-पुथल और विरोधों के बीच वहां के सिविल सर्वेंट्स ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'शायद देश में जारी दिक्कतों की वजह से ही प्रशासनिक अधिकारियों ने जिम्मेदारीपूर्वक अपनी ड्यूटी निभाई है।' यही वजह है कि सर्वे में थाइलैंड को तीसरे पायदान पर रखा गया है।

Saturday, May 30, 2009

मायावती को झटके पे झटका !!

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना पर रोक लगा दी है, गंगा महासभा और विंध्य इंवायरमेंटल सोसाइटी की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायामूर्ति अशोक भूषण और अरुण टंडन ने यह आदेश पारित किया।

न्यायालय ने अपने आदेश में इस मायावती सरकार की सबसे महत्वकांक्षी परियोजना के निर्माण के लिए स्टेट लेवल इनवायरमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी की मंजूरी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। राज्य सरकार द्वारा गठित इस कमेटी ने गत जुलाई 2007 को परियोजना को अपनी मंजूरी दी थी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि एक्सप्रेस वे के निर्माण में राज्य सरकार फिर से इस कमेटी की स्वीकृति ले।

याचिकाकर्ता राहुल मिश्रा ने कहा कि नोएडा से बलिया को जोड़ने वाली गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण में प्रदेश सरकार ने पर्यावरण के नियमों की अनदेखी की। याचिका में परियोजना के निर्माण के लिए स्टेट लेबल इनवायरमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी की तरफ से दी गई स्वीकृति पर भी सवाल उठाए गए।

राज्य सरकार ने स्टेट लेवल इनवायरमेंट इम्पैक्ट एसेसमेंट अथॉरिटी का गठन केंद्र सरकार द्वारा 14 जुलाई 2006 को जारी अधिसूचना के निर्देशों के आधार पर किया था।

Friday, May 29, 2009

मीडिया पर मीडियाविद का आरोप, मीडिया चारित्रिकपतन की और !

बीते चुनाव में मीडिया ने भ्रष्ट आचरण की सारी हदें पार कर दी हालांकी इस बार के चुनाव में प्रत्याशी और राजनैतिक दल कुछ संयमित रहे और विगत चुनाव की अपेक्षा अमर्यादित संवाद और प्रसार कम हुआ जिसको मीडिया ने अपनी करतूतों से पुरा कर दिया। चाहे प्रत्याशियों से पैसे लेकर ख़बर छापना हो या फ़िर ब्रेकिंग न्यूज़ को विज्ञापन की तरह प्रसारित करना मीडिया ने अपनी कमाई के लिए सारे हथकंडे अपनाए।

'लोकसभा चुनाव में मीडिया की भूमिका' विषय पर यहाँ माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोयडा परिसर द्वारा ने एक गोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसमें मीडिया विद ने ये विचार दिए।

जहाँ अनेक मीडिया विद का मानना था की मीडिया को स्वयं अपनी भूमिका पर समीक्षा कर अपने ऊपर अंकुश लगाना चाहिए। भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जीएन रे ने मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा की मीडिया पर निगरानी के लिए एक प्रणाली की जरूरत है।

हम भूले नही हैं जब कुछ दिनों पूर्व ही मुंबई आतंकी हमले के बाद जब सरकार ने मीडिया पर नकेल कसने की तैयारी की थी तो सारे मिडिया वाले सियार की तरह हुआं हुआं करते हुए एक स्वर में मीडिया की आजादी हनन की आवाज उठाई थी मगर समय ने साबित किया की भारतीय मीडिया सियार की शकल अख्तियार करता जा रहा है। आमजनों की भावना को बाजार में बेचा जा रहा है।

संगोष्ठी में अंग्रेजी दैनिक 'द पायनियर' के संपादक और सांसद चंदन मित्रा ने कहा कि इस बार के चुनाव में मीडिया की नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही भूमिका रही है। मीडिया ने जहाँ लोगों को वोट देने के लिए जागरूक करके सकारात्मक भूमिका निभाई वहीं कथित तौर पर पैसे लेकर खबरें छापकर या दिखाकर उसने भ्रष्टाचार की नई इबारत गढ़ दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रानिक मीडिया ने पूरे चुनाव को मनोरंजन के रूप में लिया और ब्रेकिंग न्यूज दिखाकर अपनी टीआरपी बढ़ाई। इससे खबरों की विश्वसनीयता नीचे गिर गई। मित्रा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बड़े चैनल विज्ञापन के नाम पर संगठित हो जाते हैं और वे पार्टियों से कहते हैं कि एक दर विशेष के नीचे हम विज्ञापन स्वीकार नहीं करेंगे।

प्रभाष जोशी ने मीडिया में आ रही इस विकृति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसके समाधान के लिए सुझाव दिया कि देशभर के पत्रकारों को एकजुट कर निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों को पैसे लेकर छापी जाने वाली खबरों को विज्ञापन का रूप देना चाहिए तथा इसकी जानकारी पाठकों को देनी चाहिए तथा सबसे महत्वपूर्ण बात कि पाठकों को आदर्श पत्रकारिता के लिए लड़ाई लड़नी चाहिए।

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति जीएन रे का लिखा हुआ भाषण वितरित किया गया जिसमें कहा गया कि पत्रकारिता के मूल्यों और मीडिया पर विश्वास को बनाए रखने रहने के लिए पत्रकारों को आत्ममंथन करना होगा। उनके लिए एक विनियामक बोर्ड की भी आवश्यकता है।

विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने आरोप लगाया कि इस बार के आम चुनाव में राजनीति और मीडिया ने मिलकर लोगों के साथ फरेब किया। समारोह में प्रख्यात समाजवादी चिंतक सुरेंद्र मोहन ने सवाल उठाया कि क्या भारत में मीडिया कभी निष्पक्ष रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि मीडिया को निष्पक्ष बनाने के लिए एडिटर्स गिल्ड और भारतीय प्रेस परिषद जैसी संस्थाओं को मजबूत बनाना होगा।

वरिष्ठ पत्रकार नंदकिशोर त्रिखा ने कहा कि पत्रकार गहरे संकट में हैं जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। स्तंभकार अवधेश कुमार ने कहा कि कथित तौर पर पैसे लेकर जगह बेचने की समस्या में केवल मीडिया का दोष नहीं है, यह लोकंतत्र का दोष है। लोकतंत्र, पूँजीवाद और मीडिया एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। पूर्व मंत्री सोमपाल शास्त्री ने कहा कि समाचार पत्रों का ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार बढ़ा लेकिन सामाजिक समस्याएँ समाचार पत्रों में अब कोई मुद्दा नहीं हैं। विश्वविद्यालय के नोयडा परिसर के निदेशक प्रो। अशोक टंडन ने कहा कि मीडिया ने कई आपत्तिजनक भाषणों के अंशों को दिखाया जो कि मानहानि के अंतर्गत आता है।

मीडिया की इस संदेसाह्पद भूमिका के लिए नि:संदेह मीडिया ही जिम्मेदार है। सरकार बन्ने के बाद जिस तरह संभावित पाँच साल के सरकारी विज्ञापन के लिए मीडिया महिमा मंडन में लगा हुआ है चिंतनीय है।

दस पैसे में लोकल पच्चीस पैसे में एस टी डी : ए राजा !

नई दिल्ली।। शायद .राजा इस बार अपने आलोचकों को कोई मौका नहीं देना चाहते। यही वजह है कि मिनिस्टर बनने के एक दिन बाद ही राजा ने लोगों को राहत पहुंचानेवाला एक बड़ा ऐलान किया है। ए। राजा ने शुक्रवार को ऐलान किया कि एसटीडी और लोकल कॉल की दरें सस्ती होंगी। उन्होंने कहा कि लोकल कॉल की दरें घटकर 10 पैसे प्रति मिनट हो जाएंगी और एसटीडी कॉल की नई दरें 25 पैसे प्रति मिनट होंगी।

ए।राजा डीएमके कोटे से कैबिनेट मिनिस्टर बने हैं। पिछली सरकार में दयानिधि मारन के हटने के बाद ए।राजा आईटी ऐंड कम्यूनिकेशन मिनिस्ट बने थे। इस बार भी उन्हें आईटी ऐंड कम्यूनिकेशन मिनिस्ट्री मिली है। मंत्री बनते ही उन्होंने कॉल दरें सस्ती करने के ऐलान के साथ ही अपने मजबूत इरादों का परिचय दे दिया है।


राजा डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि की बीवी रजाती अम्माल के नजदीकी माने जाते हैं। वह तमिलनाडु के नीलगिरी सीट से जीतकर संसद में पहुंचे हैं। पिछली सरकार में उनके कामकाज पर उंगलियां उठी थीं और पिछले दिनों जब डीएमके-कांग्रेस खींचतान चल रही थी, तब यह खबर आई थी कि राजा का कामकाज संतोषजनक नहीं था, इसलिए कांग्रेस उन्हें मंत्री बनाना नहीं चाहती थी।

Thursday, May 28, 2009

आंकडा,बहुमत,जोड़-तोड़, सरकार और लोकतंत्र !


नयी सरकार बन चुकी है और एक बार फ़िर से सिंह इज किंग। सरकार बनने के लिए २७२ का आंकडा भले ही यु पी ऐ ने पूरा न किया हो मगर जब बात आंकडों का हो तो सब सही है आख़िर जोड़ तोड़ और राजनीति की बिसात पर अपना अपना हित जो है।

२६२ के साथ युपीऐ सबसे बड़ी मगर बहुमत के लिए दस कम तो मामला फ़िर आंकडे से। सरकार से सहयोग या सरकार से स्वयंहित की सिद्धि की समर्थनों का तांता, मामला यहाँ भी आंकडे का। चुनाव पूर्व गठबंधन और चुनाव के बाद समझौता सरकार बनाने के लिए चाहे इसके लिए राष्ट्र से समझौता क्यूँ न करने पड़े पहले चरण के मतदान में ६० फीसदी मतदाता ने अपने मतदान का उपयोग किया यानि की ४० फीसदी लोगों ने अपना मत नही डाला। दुसरे चरण में ये प्रतिशत और गिरा और सिर्फ़ ५५ प्रतिशत लोगों ने मत गिराए इस बार मत ना डालने वालों का आंकडा ४५ प्रतिशत का रहा। तीसरे चरण में आंकडा आधे आधे पर आ गया यानि की ५०-५०। चौथे चरण में कुछ इजाफा हुआ और ५७ प्रतिशत लोगों ने मत डाले यानि की ४३ प्रतिशत ने मत नही डाले। अन्तिम चरण भी उत्साहवर्द्धक नही रहा और ५५ प्रतिशत मतदान हुआ ४५ प्रतिशत शिफर रहे।

अब जरा इस आंकडे को लोकतंत्र के नजरिये से समीक्षा करें तो कुल जमा ५५ प्रतिशत के करीब मतदान हुआ और ४५ प्रतिशत लोगों ने वोट नही डाले। चलिए इस आंकडे को जरा और नजदीक से देखते हैं...

१०० प्रतिशत लोगों में से ५५ प्रतिशत लोग ने मत का उपयोग किया और ४५ प्रतिशत ने नही किया। अब जरा ५५ प्रतिशत को आगे बढायें तो ५५ में से ४० प्रतिशत ला कर आप सरकार बना लें। अब इस आंकडे को आगे बढायें तो ५५ का ४० प्रर्तिशत यानि २२ प्रतिशत।

आप कह रहे होंगे मैं किस नम्बर के खेल में आपको उलझा रहा हूँ तो नि:संदेह ये नंबर का ही तो खेल है अब जरा पुरे भारतवर्ष को एक कर इस आंकडे पर नजर डालें तो २२ फीसदी मत लाकर आप जनता की सरकार बन जाते हैं।

एक नजर चुनाव में हुए मतदान के आंकडों पर.....



Tuesday, December 30, 2008

HUM HUM H TO KYA HUM H TUM TUM HO TO KYA TUM HO

Humne maana ki tumne khushboo se mehkake ghar rakh diya Par bolo kitne phoolon ke sar iske liye kaat ke rakh diya Apna chehra na poncha gaya aapse, aayna bewajah tod ke rakh diya Tumne ye kya kiya aandhi mein chirag rakhh diya Ya allah tu ne ye kya kiya, mere seene mein ye masoom dil rakh diya Tadapta raha jis pyar ke khatir uske liye lamba safar tai karna likh diya♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥Manzil na de charag na de hosla to de,tinke ke ka hi sahi tu magar aasara to de.Maine ye kab kaha ke mere Haq me ho jawaab,lekin khamosh kyun hey tun koi faisla to de.Barson mein tere naam par khata raha farebmere khuda kahan hai tun apna pata to de.Beshak mere naseeb par rakh apna ekhtiyar,lekin mere naseeb, main kya hai bata to de.♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥♥KOi TUM SY POOCHY KON HOON MAiN TUM KAH DYNA KOi KHAS NAHiN AiK DOST HAI KACHA PAKKA SA AiK JHOOT HAi ADHA SACHA Sa JAZBAT KO DHANPY AiK PERDA BAS AiK BAHANA ACHA SA JEEVAN KA AiK AYSA SATHi HAi JO DOOR NA HO K PASS NAHiN KOi TUM SY POOCHY KON HOON MAiN TuM KEH DYNA KOi KHAS NAHiN


Free Blogger Templates by Isnaini Dot Com and Wedding Dresses. Powered by Blogger